लेकर चुंनड़ी हाथां म तेरा सेवक नाचे रे

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

लेकर चुंनड़ी हाथां म तेरा सेवक नाचे रे,

जगत सेठानी का जगत में डंका भाजे रे,

लेकर चुंनड़ी हाथां म तेरा सेवक नाचे रे

म्हारा दादी जी को खूब स्झो है शृंगार,

भगता ने निरख रही या बाँट रही है प्यार,

दादी को शृंगार यो प्यारो म्हाने बहुत लुभावे से,

झूम झूम कर सेवक नाचे थारे आगे रे,

लेकर चुंनड़ी हाथां म तेरा सेवक नाचे रे

लाल रंग की चुनड़ी मइयां थारे थाई लाया रे,

इ चुनड़ में सब भगता प्यार मिलाओ रे,

लेकर चुंनड़ी हाथां म तेरा सेवक नाचे रे

दादी थारा टाबरिया को हर दम साथ वाजे रे,

जब भी भुलावा आ कर के मान बढ़ावे रे,

लेकर चुंनड़ी हाथां म तेरा सेवक नाचे रे

राजा बोले दादी हर दम माहने दर पे भुला जे रे,

जो भी आवे दर पे थारे काम बना जे रे ,

लेकर चुंनड़ी हाथां म तेरा सेवक नाचे रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।