कसमे वादे प्यार वफ़ा सब

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॥ पावन पाठ ॥

कसमे वादे प्यार वफ़ा सब

बातें हैं बातों का क्या

कसमे वादे प्यार वफ़ा सब

बातें हैं बातों का क्या

कोई किसी का नहीं ये झूठे

नाते हैं नातों का क्या

कसमे वादे प्यार वफ़ा सब

बातें हैं बातों का क्या

होगा मसीहा...

होगा मसीहा सामने तेरे

फिर भी न तू बच पायेगा

तेरा अपना...

तेरा अपना खून ही आखिर

तुझको आग लगाएगा

आसमान के...

आसमान के उड़ने वाले

मिट्टी में मिल लगाएगा

कसमे वादे प्यार वफ़ा सब

बातें हैं बातों का क्या

सुख में तेरे...

सुख में तेरे साथ चलेंगे

दुख में सब मुख मोड़ेंगे

दुनिया वाले...

दुनिया वाले तेरे बनकर

तेरा ही दिल तोड़ेंगे

देते है...

देते हैं भगवान को धोखा

इन्सां को क्या छोड़ेंगे

कसमे वादे प्यार वफ़ा सब

बातें हैं बातों का क्या

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।