वंदे मातरम्

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन देश भक्ति भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

वन्दे मातरम्।

सुजलाम् सुफलाम् मलय़जशीतलाम्,

शस्यश्यामलाम् मातरम्। वन्दे मातरम्।। १।।

शुभ्रज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्,

फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,

सुहासिनीम् सुमधुरभाषिणीम्,

सुखदाम् वरदाम् मातरम्। वन्दे मातरम्।। २।।

कोटि-कोटि कण्ठ कल-कल निनाद कराले,

कोटि-कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले,

के बॉले माँ तुमि अबले,

बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीम्,

रिपुदलवारिणीं मातरम्। वन्दे मातरम्।। ३।।

तुमि विद्या तुमि धर्म,

तुमि हृदि तुमि मर्म,

त्वम् हि प्राणाः शरीरे,

बाहुते तुमि माँ शक्ति,

हृदय़े तुमि माँ भक्ति,

तोमारेई प्रतिमा गड़ि मन्दिरे-मन्दिरे। वन्दे मातरम् ।। ४।।

त्वम् हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,

कमला कमलदलविहारिणी,

वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्,

नमामि कमलाम् अमलाम् अतुलाम्,

सुजलां सुफलां मातरम्। वन्दे मातरम्।। ५।।

श्यामलाम् सरलाम् सुस्मिताम् भूषिताम्,

धरणीम् भरणीम् मातरम्। वन्दे मातरम्।। ६।।

रचयिता - बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।