हम अपने सँवारे की मस्ती में रहते है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ये जग दुनिया वाले हमे पागल कहते है,

हम अपने सँवारे की मस्ती में रहते है,

दीवानो की दुनिया का आलहम ही निराला है,

खुशियों में तो रोते है मुश्किल में हस्ते है,

हम अपने सँवारे की मस्ती में रहते है,

कोई धन का पागल है कोई तन का पागल है,

हम पागल सांवर के बड़ी शान से कहते है,

हम अपने सँवारे की मस्ती में रहते है,

मिल जाए कोई प्रेमी न हेलो न हाये

हम हर इक प्रेम को राधे राधे कहते है,

हम अपने सँवारे की मस्ती में रहते है,

गली गली जाके कनु भजन सुनाता है,

सब नच नच सांवर के जय कारे कहते है,

हम अपने सँवारे की मस्ती में रहते है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।