डम डम डम वज्दा डमरू शंकर दा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जदो भजदा बदल वांगु गज दा डमरू शंकर दा,

डम डम डम वज्दा डमरू शंकर दा,

अम्ब्रा ते वजेया पताल विच सुनियाँ तीनो लोक सारिया जहां विच सुनिया,

ऐसे ताल च भजदा डमरू शंकर दा.

डम डम डम वज्दा डमरू शंकर दा,

वजे जड़ों डमरू कमाल करि जांदा है,

मस्ती दे रंग विच निहाल करि जांदा है,

सब दे पर्दे कज दा डमरू शंकर दा,

डम डम डम वज्दा डमरू शंकर दा,

डमरू ने मस्त मलंग कर छड़िया,

सोनू ते फकीरी वाला रंग कर छड़िया,

विच तिरशूल दे सज दा डमरू शंकर दा,

डम डम डम वज्दा डमरू शंकर दा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।