तेरा सुमिरन तेरा दर्शन यही आधार मेरा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरा सुमिरन तेरा दर्शन यही आधार मेरा

इसके बदले मैं ज़माने की कोई चीज़ न लू

मुझे है नाज़ प्रभु आपकी इस रेहमत पे

मैं तो हर रोज़ तेरे गीत गुनगुनाता हु

मुझे डरकर नहीं श्याम किसी उत्सव की

मैं तो होली दिवाली रोज़ ही मनाता हूँ

तेरा जलसा तेरा कीर्तन यही त्यौहार मेरा

इसके बदले मैं ज़माने की कोई चीज़ न लू

मैंने देखे हियँ दुनिया भर के नज़ारे लेकिन

मेरे मन को तो श्याम बस तेरा ही दर भये

तेरी चौखट पे सर झुका के चैन मिलता यूँ

जैसे बच्चे को माँ की गॉड में सुकून आये

तेरा मंदिर तेरा आंगन यही घरबार मेरा

इसके बदले मैं ज़माने की कोई चीज़ न लू

मेरे हाथों की लकीरों में जो लिखा ना था

मैंने तेरे दर से श्याम रिश्ता वो भी पाया है

मुझे जब भी पड़ी डरकर तेरी रेहमत की

श्याम परेमी के रूप में तू ही तो आया है

तेरे प्रेमी तेरे सेवक यही परिवार मेरा

इसके बदले मैं ज़माने की कोई चीज़ न लू

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।