दिखाऊं कोनी लाड़लो

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

दिखाऊं कोनी लाड़लो,नजर लग जाए,

नजर लग जाए रे,​ जुलम होय जाए,

विषधर तेरे गले में लिपटे, अंग भभूत रमाए,

तेरे रूप को देखके जोगी, लाल मेरो दर जाये,

दिखाऊं कोनी लाड़लो.......................

​सुन बातें मैया की भोले, मंद मंद मुस्काये,

जिससे सारा जगत है डरता, उसको कौन डराये,

दिखाऊं कोनी लाड़लो.......................

​हो उदास शिव भोले शम्बू, अपने कदम बढ़ाये,

शिव को जाते देख कन्हैया, रो रो कर चिल्लाये,

दिखाऊं कोनी लाड़लो.......................

​नन्दलाल का रोना सुनकर, बोली मात यशोदा,

नजर लगा दी मेरे लाल को, हाय हाय अब क्या होगा,

दिखाऊं कोनी लाड़लो.......................

इतना सुनकर मात यशोदा, मोहन को ले आई,

दर्शन किये हरी के शिव ने, "राजू" ख़ुशी मनाई,​

​दिखाऊं कोनी लाड़लो.......................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।