ओ गोरख तेरे धुनें पे आया

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॥ पावन पाठ ॥

ओ गोरख तेरे धुनें पे आया,

ओ बाबा जी तेरे धुनें पे आया,

संकट मेरे काटो बाबा दुःख मैं घना पाया,

ओ गोरख तेरे धुनें पे आया,

दिलवा मेरा सारा घुमा बड़ा परेशान है,

लूट गये नाथ मेरे सारे अरमान है,

बाबा मेरे अंतर् यामी तू मेरा भगवान है,

राखो मेरी लाज नाथ जी चिंता ने खाया ,

ओ गोरख तेरे धुनें पे आया,

आस करके आया बाबा तेरे दरबार पे,

इक नजर करो बाबा मेरे परिवार पे,

मने है भरोसा बाबा पूरा तेरे प्यार पे,

संकट के मारो ने बाबा प्यार तेरा पाया,

ओ गोरख तेरे धुनें पे आया,

दिन मेरे फेर बाबा रात मैं गाऊगा ,

वेद प्रकाश शर्मा ने भाव से भुलाऊ गा.

ललित ने प्यार दे दे रॉट भी चढ़ाऊंगा,

राज मेहर तेरा पागल बाबा राजू भी आया,

ओ गोरख तेरे धुनें पे आया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।