धन तेरी लीला धन शक्ति तेरी

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॥ पावन पाठ ॥

धन तेरी लीला धन शक्ति तेरी,

करदे रवागे सदा भगति तेरी,

आये छड़ के दुनिया सारी सतगुरु बावा लाल जी,

लेखे लावा गे जिंदगी सारी एह सतगुरु बावा लाल जी,

करिये बखान की महिमा तेरी दा कोई अंत न कोई कारवार है,

पोतक निराले तेरे सतगुरु प्यारे एह ता जान दा ही सारा संसार है,

तेरी लीला बड़ी है न्यारी हे सतगुरु बाबा लाल जी,

लेखे लावा गे जिंदगी सारी एह सतगुरु बावा लाल जी,

कोई नहीं एहो जेहा जिहने तेरे दर उते झोली न फैलाई,

हर इक जीव हर इक फल फूल पते विच लाल तेरी शक्ति समाई,

सब दी तकदीर सवारी हे सतगुरु बावा लाल जी,

लेखे लावा गे जिंदगी सारी एह सतगुरु बावा लाल जी,

तेरे दम नाल इस जग ते उजाला तेरे दम नाल खुशिया ते हासे,

तेरे दम नाल गुलशन च बहारा तेरी महक है चारे पास,

पूजा करदे ने नर ते नारी हे सतगुरु बावा लाल जी ,

लेखे लावा गे जिंदगी सारी एह सतगुरु बावा लाल जी,

जिस ने भी याद किता दिल विचो तनु ओहनू आप ही दर ते भुलाया,

झट पट उस न मुराद मिल गई जिहने इक वारि सिर न झुकाया,

ाउनि कदो सुखदेव दी वारि हे सतगुरु बावा लाल जी ,

लेखे लावा गे जिंदगी सारी एह सतगुरु बावा लाल जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।