आई माँ के जगराते की रात

पारंपरिक
हनुमान जी भजन दुर्गा भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

ढोली ढोल मचा माँ के नाम का,

आई माँ के जगराते की रात नाचे गे छम छम आज रे

मैया सिंह सवारी पे सझ रही,

पीछे वेरो आगे अंजनी के लाल,

नाचे गे छम छम आज रे

माँ के नाम की चुनरी को ओढ़ के,

माँ के सामने मैं तो सारी रात

नाचे गे छम छम आज रे

मेरी भइयाँ पकड़ ली है माई ने,

अब फ़िक्र की है क्या बात,

नाचे गे छम छम आज रे

केशव छोड़ दे सब कुछ दादी पर,

अब मैया का है सिर पर हाथ,

नाचे गे छम छम आज रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।