तुसी जग दे हो वाली जग तुसा दा सवाली

पारंपरिक
अन्य भजन बावा लाल दयाल भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तुसी जग दे हो वाली जग तुसा दा सवाली,

डेरा भगता द्वारे तेरे ला लिया,

बावा लाल जी ध्यान पुर वालेया,

तुसा भेद उच्च नीच दा मिटाया है,

सारे जग दा प्यार झोली पाया है,

कोई लाल कह भुलावे सतगुरु कोई ध्यावे,

किसे पीर तनु अपना बना लिया,

तुसी जग दे हो वाली जग तुसा दा सवाली,

तुसी रेख विच मार दे हो मेख,

नवे लिखदे दुबारा तुसी लेख जी,

तेरे वल जेहड़ा आवा ओह ता वल होक जावे,

दुःख जन्मा दा उस ने मिटा लिया,

बावा लाल जी ध्यान पुर वालेया,

तुसी जग दे हो वाली जग तुसा दा सवाली,

तुसा वंडियां जहां ते वजारियाँ आप मानिया फ़कीरिया ते पीरियाँ,

भरम रूपी भरम चारि लेनी नाम दी खुमारी,

सिर ताज है फकीरी दा सजा लिया,

बावा लाल जी ध्यान पुर वालेया,

तुसी जग दे हो वाली जग तुसा दा सवाली,

नइयाँ पापियाँ दी तार दिखाई है,

जीवे दूध तर दी मलाई है,

फानी तेरे ही द्वारे नित आरती उतारे दिल विच तेरा प्यार है वसा लिया,

बावा लाल जी ध्यान पुर वालेया,

तुसी जग दे हो वाली जग तुसा दा सवाली,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।