हे गोरी गोगा जी के द्वार चले

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हे गोरी गोगा जी के द्वार चले अब के बोलो संग,

बलम जी हो जा बेडा पार चले मेरे मन में उठी उमंग,

भीड़ चली भगतन की भारी,

भर भर जावे मोटर गाडी,

जैकारे ल्यावे नर नारी,

भगति में है सुरति धारी,

महारी टेर सुनेगे गोगा जी मेरा पुलकित हो गया अंग,

बलम जी हो जा बेडा पार चले मेरे मन में उठी उमंग,

गोगा जी के दर जो जाता जो चाहे बाबा से पाता,

भक्तन का भागविधाता पल में सोया भाग जगाता,

जो गाता निष् दिन गोगा नाम कभी भी नहीं रहे वो तंग,

बलम जी हो जा बेडा पार चले मेरे मन में उठी उमंग,

जा हरवीर कदम अवतारा दीं दुखी का सदा सहारा,

गौ सेवक है पाछल प्यारा गुगु काज कहे जग सारा,

बेह राही भगति की धारा बरसाए ख़ुशी के रंग,

बलम जी हो जा बेडा पार चले मेरे मन में उठी उमंग,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।