दिन रात जपां मैं तेरा नाम ज्वाला माँ

कुमार विशु
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

एहो आस एहो अरदास मेरी,

ऐनी मिन्नत माए मंजूर करीं

जदो होंण हनेरिया रातां माँ

ज्योतां दा ज्वाला नूर करीं

दिन रात जपां मैं तेरा नाम, ज्वाला माँ

मेरे घर विच्च रखीं सुख दा सदा उजाला माँ

न पवे दुखां दे नाल कदे मेरा पाला माँ

भावें मेरे सर ते शाहां वाला ताज ना रखीं

होर किसे दे दर दा मैनू पर मोहताज न रखीं

तैनु भेंट करां मैं भेंटा वाली माला माँ

दिन रात जपां मैं तेरा नाम, ज्वाला माँ

चन चड़े खुशीआं दा दाती तेरे लाल दे वेहड़े

दर तेरे ते भरां हाजरी वंडा लड्डू पड़े

मैनू वेख के लोकी केहन है कर्मा वाला माँ

दिन रात जपां मैं तेरा नाम, ज्वाला माँ

जय ज्वाला माँ बोल के जगना जय ज्वाला कह सोना

सपने विच्च वी कदे दातिए वख नहीं तैथो होना

तेरी मेहर दा मेरी हर गल विच हवाला माँ

दिन रात जपां मैं तेरा नाम, ज्वाला माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।