बरसे अमृत धार मैया जी तेरे भवनों पे

कुमार विशु
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बरसे अमृत धार मैया जी तेरे भवनों पे

गूंजे जय जयकार मैया जी तेरे भवनों पे

श्रद्धा से इक बार जो चलके द्वार तुम्हारे आता है

दुःख संताप मिटे उसके हर रोग दूर हो जाता है

तेरी किरपा से हो उपचार, मैया तेरे भवनों पे

बरसे अमृत धार...

तेरे दर से कोई सवाली खाली हाथ नहीं जाता

जिस पर मेहर करे तू दाती मन चाहा वर पा जाता

तेरी कृपा से मिलता ऐसा प्यार, मैया जी तेरे भवनों पे

बरसे अमृत धार...

कैसे कैसे अजब करिश्मे मैया तुम दिखलाती हो

आती नहीं नज़र खुद फिर भी झोलिया भरती जाती हो

तेरी कृपा से भर जाएँ भण्डार, मैया जी तेरे भवनों पे

बरसे अमृत धार...

सुनके महिमा तेरी दया की ‘दास’ भी दर पे आया है

चरण तेरे धोने को अक्ष आँखों में भर लाया है

तेरी कृपा से हो उद्धार, मैया जी तेरे भवनों पे

बरसे अमृत धार...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।