प्राण बंसी में वसे है नन्द किशोर के

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधे दे दे बंसी मेरी कब से करू खुशामत तेरी मैं हाथ जोड़ के,

प्राण बंसी में वसे है नन्द किशोर के,

कान्हा ना दू बंसी तेरी ये तो बनी है सोतन मेरी,

रखी है झ्त्जोर के आज फेंकू गी मैं बंसी तेरी तोड़ के,

तेरे होठ से लग के बंसी मेरो जियो जरावे,

उपर से तू जाकर उपर अपनों हाथ फिरावे,

चलती छुरियां मेरे दिल मे काओ दिल जाऊ गी उल्जन में दुनिया छोड़ के,

फेंकू गी बंसी में तेरी तोड़ की,

छोटी सी बंसी के पीछे मत कर जोहर खाने,

टूट गई तो मर जावे गे बंसी के दीवाने,

चीड़ियाँ चेहके गी न कुल में लाखो दिल टूटे गे पल में कोयल मोर के,

प्राण बंसी में वसे है नन्द किशोर के,

कान्हा तेरी जा बंसी ने जोगन मोहे बनायो,

धुन सुन ने को पल पल भटकू एसो रोग लगायो,

चडके रोज कदम की डाली बंसी मीठी और मतवाली भजावे भोर से,

आज फेंकू गी बंसी तेरी तोड़ के,

आज तलग तो मैंने तुझको समजा नही परायो रंग रूप तेरे दिल में मेरे समायो,

तू है मुझे जान से प्यारी काहे लखा लिखे लिखारी शब्द में जोड़ के ,

प्राण बंसी में वसे है नन्द किशोर के,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।