अपना तो खाटूवाला बाबा बड़ा दिलवाला लखदातार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जय जय बाबा श्याम..जय जय खाटू धाम..

जय जय बाबा श्याम..जय जय खाटू धाम..

ये राज दिलो पे करता है खाटूवाला श्याम मेरा,

भगतों की झोली भरता है खाटूवाला श्याम मेरा,

दुनिया में श्याम के जैसा ना कोई देव मिलेगा,

तुम जय श्री श्याम कहोगे,ये बेडा पार करेगा..करेगा..करेगा..

अपना तो खाटूवाला,बाबा बड़ा दिलवाला,लखदातार...

हारे का है सहारा ये श्याम हमारा..हारे का है सहारा..

श्याम कलयुग अवतारी,ये लीले का असवारी,

बाबा की महिमा सारे जग से न्यारी रे,

जो भी शरण में आये,उसको ये गले लगाए,

चरणों में शीश झुकाए दुनिया सारी रे,

जो श्याम की किरपा होगी,बिन पानी नांव चला दे,

गर सांवरिया चाहे तो निर्धन को सेठ बनादे..बनादे..बनादे..

अपना तो खाटूवाला,बाबा बड़ा दिलवाला,लखदातार...

हारे का है सहारा ये श्याम हमारा..हारे का है सहारा..

जय जय बाबा श्याम..जय जय खाटू धाम..

जय जय बाबा श्याम..जय जय खाटू धाम..

आजा तू आजा प्यारे,श्याम की महिमा गाले,

खाटूवाले का ये दरबार निराला रे,

श्याम की किरपा होगी,खुशियों की वर्षा होगी,

खुल जाएगा तेरी किस्मत का ताला रे,

बाबा का दर है सच्चा,पल-पल ये देता पर्चा,

घर-घर में जाके देखो,है श्याम धनि की चर्चा..चर्चा..हाँ चर्चा..

अपना तो खाटूवाला,बाबा बड़ा दिलवाला,लखदातार...

हारे का है सहारा ये श्याम हमारा..हारे का है सहारा..

कहीं तू लीले वाला,कहीं अहिला का लाला,

कोई कहता है तुझको श्याम कन्हइया रे,

तू है हारे का साथी,मेरी नईया का मांझी,

भक्तों की नईया का तू ही खिवईया रे,

जो माँगा है पाया है,जो शरण तेरी आया है,

ये जग सारा सांवरिया,सब तेरी ही माया है..माया है..माया है..

अपना तो खाटूवाला,बाबा बड़ा दिलवाला,लखदातार...

हारे का है सहारा ये श्याम हमारा..हारे का है सहारा..

जय जय बाबा श्याम..जय जय खाटू धाम..

जय जय बाबा श्याम..जय जय खाटू धाम..

भगतों का काम बनाये,हाथों में जब लहराए,

बाबा की मोरछड़ी है जादूगरी रे,

इसका झाड़ा लगवाले,अपनी किस्मत चमका ले,

मोरछड़ी बाबा को लगती प्यारी रे,

जब श्याम के हांथों में ये मोरछड़ी घूमेगी,

"सौरभ-मधुकर" के संग में दुनिया सारी झूमेगी..झूमेगी..झूमेगी..

अपना तो खाटूवाला,बाबा बड़ा दिलवाला,लखदातार...

हारे का है सहारा ये श्याम हमारा..हारे का है सहारा..

रचयिता - सौरभ मधुकर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।