यो तो दूर सै दिखै रे खाटूवाले को निशान

सौरभ मधुकर
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

यो तो दूर सै दिखै रे खाटूवाले को निशान,

म्हारे बाबा को निशान ...

खाटूवाले सांवरे की या ही है पहचान |

केसरिया निशान माहि सांवरो बिराजे,

रंग-बिरंगी ध्वजा देखकर इंद्र-धनुष भी लाजे,

श्याम का जयकारा लगाता पैदल चल तू खाटूधाम,

खाटूवाले सांवरे की या ही है पहचान |

आता-जाता श्याम धनि का सेवक जय-जय बोले,

लहरातो निशान देख भगतां को मनड़ो डोले,

सरपट चाल तू तो खाटू,बठे मिलसी बाबो श्याम,

खाटूवाले सांवरे की या ही है पहचान |

पैदल चलता मारग माहि मत ना तू घबराजे,

थक जावे तो श्याम धनि को जयकारों लगाजे,

कोई राजेन्द्र सांवरिया तेरो राखैगो सम्मान,

खाटूवाले सांवरे की या ही है पहचान |

यो तो दूर सै दिखै रे खाटूवाले को निशान,

म्हारे बाबा को निशान ...

खाटूवाले सांवरे की या ही है पहचान |

लीले वाले सांवरे की या ही है पहचान |

शीश के दानी सांवरे की या ही है पहचान |

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।