सुदामा की झोपडी महल में बदल गई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

की कन्हियाँ ने दया कोई कष्ट न रहा,

सारी विपदा टल गई,

सुदामा की झोपडी महल में बदल गई

जिंदगी में गम मिले तभी जयदा कम मिले कन्हियाँ के प्यार में आया दरबार में,

मुँह नहीं खोल स्का कुछ नहीं बोल स्का लीला बड़ी अपार आंसू ख़ुशी में ढल गई,

सुदामा की झोपडी महल में बदल गई

सखा वाल मन के थे गुरु जी के मन के थे,

गरीबी परिवार में दुखी संसार में बिन मांगे दे दियां,

सारा दुःख उन्हें लिया वेहरी श्री श्याम कहानी बन ये कमल गई,

सुदामा की झोपडी महल में बदल गई

कान्हा कैसे प्रीत है रीत में ही जीत है,

जीत ही कमल सिंह जिंदगी का रीत है,

ढीला रंग सुदामा का बदला रंग सुदामा का,

घर पौंछा रोनकार नई जिंदगी मिल गई,

सुदामा की झोपडी महल में बदल गई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।