जिस बहिन का भाई नहीं

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॥ पावन पाठ ॥

राखी का त्यौहार है सुन लो बहनो मेरी ओ प्यारी,

जिस बहिन का भाई नहीं हो रोती विलकती वेचारी,

भाई के बिन बहिन रो रही राखी ले कहती है,

भाइयाँ मेरा क्यों नहीं मियां यही शिकायत करती है,

बिन भाई त्यौहार ये कैसा सुन ले मियां ओ म्हारी,

जिस बहिन का भाई नहीं हो रोती विलकती वेचारी,

रक्षाबंधन भाई दूज त्यौहार ये प्यारा है बहनो,

हर भाई से यही दुआ है राखी बहिन हाथो पहनो,

राखी का है फर्ज निभाना मैया की जिमेवारी,

जिस बहिन का भाई नहीं हो रोती विलकती वेचारी,

इस कलयुग में कृष्ण के जैसा कास सभी का भाई हो,

अपनी बहिन की लूट ती जिसने आके लाज बचाई हो,

अमन राणा और बहिन की जोड़ी सब से है न्यारी,

जिस बहिन का भाई नहीं हो रोती विलकती वेचारी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।