चली मैं वृंदावन को चली

भैया राजू कटारिया मोगा/बरसाना
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सुनों सुनों री सुनों सखी, मैं चली वृंदावन धाम ,

यमुना जल स्नान करुगी कुंजों में विश्राम ,

हरी निकुंज में भजन करूंगी, सिमरन आठों याम ,

'मधुप' सखी भक्ति मांगूंगी, और ठाकुर से वरदान ,

मेरे रमण बिहारी ने बुलाया, बृजराज का संदेश है आया,

चली मैं वृंदावन को चली, चली मैं वृंदावन को चली ..

मोर मुकुट पीतांबर धारी, मुरलीधर मेरो रमण बिहारी,

बार-बार मेरे सपनों में आया, बृजराज का संदेश है आया,

चली वृंदावन को चली ..

बावरी होई कमली होई, प्रेम दीवानी पगली होई,

श्याम बिरहा बड़ा सताया, बृजराज का संदेश है आया,

चली मैं वृंदावन को चली ..

मुंह मेरे की बात ना टोको, जग वालों मेरा राह ना रोको,

श्याम सांवरा मेरे मन भाया, बृजराज का संदेश है आया,

चली वृंदावन को चली ..

'मधुप' यही मन की अभिलाषा, केवल हरी दर्शन की आशा,

मेरा जग से जी भर आया, बृजराज का संदेश है आया,

चली मैं वृंदावन को चली .. चली वृंदावन को चली ..

स्वर : भैया राजू कटारिया मोगा/बरसाना

संपर्क : 98140 65320

(सर्वाधिकार लेखक आधीन सुरक्षित। भजन में अदला बदली या शब्दों से छेड़-छाड़ करना सख्त वर्जित है)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।