रक्शा बंधन त्यौहार है भाई बहिन का प्यार

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॥ पावन पाठ ॥

युगो युगो से चलता आया प्रेम का ये बंधन,

भाई बहिन का रिश्ता जग में सब से है पावन,

रक्शा बंधन त्यौहार है भाई बहिन का प्यार,

बाँध के राखी इस दिन बहना भाई से कहते है,

आज से तेरी हर मुश्किल प्यारे भाइयाँ मेरी है,

जीवन की सारी खुशियां मेरी तुझको अर्पण,

भाई बहिन का रिश्ता जग में सब से है पावन,

रक्शा बंधन त्यौहार है भाई बहिन का प्यार,

अपने होते तुझपर कोई आंच न आने दूंगा,

ये जीवन देकर भी रक्शा तेरी बहिन करुगा

अपनी प्यारी बहना को भाई देता ये वचन,

भाई बहिन का रिश्ता जग में सब से है पावन,

रक्शा बंधन त्यौहार है भाई बहिन का प्यार,

सब से प्यारा सब से सूंदर सब से है अनमोल,

भाई बहिन के इस रिश्ते का मोक्ष से बढ़कर मोल,

इस पावन रिश्ते को दिल से शर्मा करे नमन,

भाई बहिन का रिश्ता जग में सब से है पावन,

रक्शा बंधन त्यौहार है भाई बहिन का प्यार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।