हम से राखी बंधवा ला तू हमार भाइयाँ

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॥ पावन पाठ ॥

आज बांटे रक्शा बंधन के त्यौहार भाइयाँ,

हम से राखी बंधवा ला तू हमार भाइयाँ,

आज बांटे रक्शा बंधन के त्यौहार भाइयाँ,

इतना ही पावन दिनवा कभू न भुलहियाँ,

जाहवा भी रहिया एह दिन घर चली आइहा,

तोड़ियाँ कबहुँ न सनहियाँ की तार भाइयाँ,

हम से राखी बंधवा ला तू हमार भाइयाँ,

कहे सब लोगवा एकर न बा कोण मोल हो,

सब से ही बढ़कर बांधे धागा अनमोल हो,

जुड़ल बांटे ऐसे सारा सनासर भाइयाँ,

हम से राखी बंधवा ला तू हमार भाइयाँ,

वादा इ तोसे बेहना कर ली हमआज हो,

मर के भी राखव तोहरी राखियां लाज हो,

खुश रह तू बस चाहे तोहार भाइयाँ,

हम से राखी बंधवा ला तू हमार भाइयाँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।