ओम महाकाल के काल तुम हो प्रभो

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ओम महाकाल के काल तुम हो प्रभो

गुण के आगार सत्यम शिवम सुंदरम।

कर में डमरू लसे चंदमा भल पर

हो निराकार सत्यम शिवम सुंदरम॥

हैं जटाबीच मंदाकिनी की छटा

मुंडमाला गलेबीच शोभित महां।

कंठ में माल विषधर लपेटे हुए

करके श्रृंगार सत्यम शिवम सुंदरम॥

बैठे कैलाश पर्वत पर आसन लगा

भस्म तन पर हो अपने लगाए हुए।

है निराली तुम्हारी ये अनुपम छटा

सबके आधार सत्यम शिवम सुंदरम॥

न्यारी महिमा तुम्हारी है त्रयलोक मे

भोले भंडारी तुम बोले जाते प्रभो।

अम्बिका और निर्मोही को आस है

कर दो उद्धार सत्यम शिवम सुंदरम॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।