करदे बेडा पार मेरा बावा लाल दयाल जी

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॥ पावन पाठ ॥

करदे बेडा पार मेरा बावा लाल दयाल जी,

जो गुरा दे चरनी लग जाये हो जाये मालामाल,

करदे बेडा पार मेरा बावा लाल दयाल जी,

सत्गुरुआ दे चरनी आके जिसने शीश झुकाया,

दुभड़ा उसदा बेडा सतगुरु पल विच पार लगाया,

सतगुरु मेरे सब दे प्यारे वनडन मावा नु लाल जी,

करदे बेडा पार मेरा बावा लाल दयाल जी,

लाल दयाल दे सब दी सुन्दा मेरी झोली खाली,

सिफ़्ता करदी सारी दुनिया तू ही जग दा वाली,

ताने मैनु मार दा रेह्न्दा एह सारा संसार,

करदे बेडा पार मेरा बावा लाल दयाल जी,

तेरी महिमा सुन के जोगी ध्यानपुर मैं आई,

विनती मेरी सुन ले दाता क्यों तू देर लगाई,

गोदी विच इक बालक देदो करदो जी उपकार,

करदे बेडा पार मेरा बावा लाल दयाल जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।