लाइ न साहणु लारा वंड मिशरी मिठाइयाँ जी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आई जग ते ज्योत नुरानी कोई नही है इस दा सानी,

बहार आके देख ली माये सचियाँ रोनका लाइया नि,

लाइ न साहणु लारा वंड मिशरी मिठाइयाँ जी,

नित नित नही अस्सा तेनु कहना बूहे तेरे अड़ के बहना,

गलत नही गल साडी कोई नैना चार गवाइया नि,

लाइ न साहणु लारा वंड मिशरी मिठाइयाँ जी,

तेरे दर की थोड नही माये पूछ सहनु की लोड नि माये,

खुश करदे दिल साडा किधरे सह न जान लड़ाईया नि,

लाइ न साहणु लारा वंड मिशरी मिठाइयाँ जी,

नूर इलाही लाल माँ तेरा रब तेरे घर पाया फेरा,

चन दूज दा चमका मारे खोइया जग रुश्नाइया नि,

लाइ न साहणु लारा वंड मिशरी मिठाइयाँ जी,

आज माये नि साहणु गल नाल लाके लड्डू साडी झोली पा के,

लाल तो वार के वंड रुपैये समज न साहणु पराइयाँ नि,

लाइ न साहणु लारा वंड मिशरी मिठाइयाँ जी,

वज रहे ने आज ढोल नगाड़े नाल सुख देव दे न्च्दे सारे,

धरती ते आकाश भी न्च्दा गूंज रहियां शेह्नाइयां,

लाइ न साहणु लारा वंड मिशरी मिठाइयाँ जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।