मिटटी खाटू धाम की नसीब हो न हो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आखरी समाय में हम करीब हो न हो

मिटटी खाटू धाम की नसीब हो न हो

जब तक तन में ये सांस रहेगी

थोड़ी सी ये मिटटी मेरे पास रहेगी

क्या पता ये धाम नज़दीक हो न हो

मिटटी खाटू धाम की नसीब हो न हो

तेरे धाम की ये मिटटी बड़ी ही महँ

इसके तो कण कण में है मेरा श्याम

इससे अच्छा मेरा ये नसीब हो न हो

मिटटी खाटू धाम की नसीब हो न हो

लाखों लाखों भक्तों के पाँव पड़े हैं

बरसों से इसमें मेरे श्याम खड़े है

अगले जनम में ये गरीब हो ना हो

मिटटी खाटू धाम की नसीब हो न हो

बनवारी मेरा ये नसीब खुल जाए

तेरी मिटटी में ये मेरी मिटटी मिल जाए

नाम मेरा भक्तों में शरीक हो ना हो

मिटटी खाटू धाम की नसीब हो न हो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।