बूटा मेरे भी आंगन च लाओ लाल जी

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॥ पावन पाठ ॥

दवारेया चो दवारा तेरा लाल दवारा,

मेरी खाली झोली विच खैरा पाओ लाल जी

बूटा मेरे भी आंगन च लाओ लाल जी

सच्ची सूचि बोली विच करे इशनान जो,

बांज भी हॉवे जेहड़ी पावे संतान ओ,

पूत वाली मैनु भी बनाओ लाल जी,

बूटा मेरे भी आंगन च लाओ लाल जी

कलि बैठी मैनु घर खान नु आउंदा सुना सुना वेहड़ा मेरे मन नु नहीं भावंदा,

मेरे वेहड़े किलकारियां गुंजाओ लाल जी,

बूटा मेरे भी आंगन च लाओ लाल जी

दाता तू किसे नु खाली नहियो मोड़ दा जदो भुलावे कोई झट पट बोहड़ दा,

भला काह्नु मैनु तरसाओ लाल जी,

बूटा मेरे भी आंगन च लाओ लाल जी

पीढ़िया चालियाँ सदा वंश वदाये तू,

हनेरेया दे विच सदा दीवे जगाये तू,

दीवा मेरे भी बणीरे ते जगाओ लाल जी,

बूटा मेरे भी आंगन च लाओ लाल जी

एह वरदान वस् तनु ही मिलियाँ हर धुना घर तेरी मेहर नाल खिलियाँ,

हूँ कहे सुख देव ना भुलाओ लाल जी,

बूटा मेरे भी आंगन च लाओ लाल जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।