असि चंगे हां या माडे बस तेरे हां सुन ले दयाल

पारंपरिक
अन्य भजन बावा लाल दयाल भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

असि चंगे हां या माडे बस तेरे हां सुन ले दयाल सतगुर,

असि मीठे हां या खारे बस तेरे हां सुन ले दयाल सतगुर,

आसा दियां डोरा बस तेरे उते रखियाँ,

हर पास तनु ही एह देख दिया अखियां,

साहनु लाइ न तू लारे बस तेरे हां,सुन ले दयाल सतगुर,

असि चंगे हां या माडे बस तेरे हां सुन ले दयाल सतगुर

डोले जदो असि साहनु गल नाल ला लिया,

लोका दियां नजारा तो साहनु तू बचा लिया,

असि बचे हा विचारी बस तेरे हां सुन ले दयाल सतगुर,

असि चंगे हां या माडे बस तेरे हां सुन ले दयाल सतगुर

सच दा वे सौदा आते सच्चा तेरा प्यार है,

मेहर तेरी दाता दा कौन ठेके दार है,

एहो आँख दे ने सारे बस तेरे हां,सुन ले दयाल सतगुर,

असि चंगे हां या माडे बस तेरे हां सुन ले दयाल सतगुर

तू ही जानी जान साढ़े दिला दियां जान दा,

झूठा है जहांन साहनु नहियो पहचान दा,

सुख देवदे प्यारे बस तेरे हां सुन ले दयाल सतगुर,

असि चंगे हां या माडे बस तेरे हां सुन ले दयाल सतगुर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।