बावा लाल प्यारे दा सहारा चाहिदा

पारंपरिक
अन्य भजन बावा लाल दयाल भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

बावा लाल प्यारे दा सहारा चाहिदा,

भूखी भूखी जींद ले गुजरा चाहिदा,

इक तेरे चरना दी धूल चाहिदी,

इक तेरे नूर दे नजारा चाहिदा,

भूखी भूखी जींद ले गुजरा चाहिदा,

लाल तेरे दर दी देहलीज दी है लोड,

इक तेरी दीद दा द्वारा चाहिदा,

भूखी भूखी जींद ले गुजरा चाहिदा,

मिलेगी जरूर साहनु मंजिला दी लोड,

साहनु तेरा रता को इशारा चाहिदा

भूखी भूखी जींद ले गुजरा चाहिदा,

जिंदगी दी पींग भावे चढ़े न चढ़े ,

साहनु तेरे प्यार दा हुलारे चाहिदा,

भूखी भूखी जींद ले गुजरा चाहिदा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।