फूला दी वरखा हो रही है बावा लाल दे दरबार

पारंपरिक
अन्य भजन बावा लाल दयाल भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

फूला दी वरखा हो रही है बावा लाल दे दरबार ते,

जिस झोली विच फूल पे गया सतगुरु ने वो तार ते

सतगुरु चरनी जो फूल लगाया बदल देवे तकदीर दी,

संगता दी झोली विच पे के पांदा प्यार जंजीरा दी,

गुरु दे दर दे इक ही फूल ने,

फूला दी वरखा हो रही है बावा लाल दे दरबार ते

इस फूल दा ते फूल कोई न फुल बड़ा अंमुला है,

झोली सब दी भर दिंदे बाबा लाल दा दर खुला है,

हर झोली विच फूल लुटा के सब दे काज सवार दे,

फूला दी वरखा हो रही है बावा लाल दे दरबार ते

ओ संगत है भागा वाली जिसनु एह फूल मिलदा है,

जिस घर दे विच खुले खेड़े ख़ुशी नाल ओह खिल्दा है,

सागर वर्गे आज ते भगतो बाबा लाल ने तार ते

फूला दी वरखा हो रही है बावा लाल दे दरबार ते

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।