रूह गद गद हो गई है दातियाँ दर्शन करके तेरे

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॥ पावन पाठ ॥

रूह गद गद हो गई है दातियाँ दर्शन करके तेरे,

तेरे गान दे चानन वे किते दूर दिला को हनेरे,

रूह गद गद हो गई है दातियाँ दर्शन करके तेरे,

मन मोहनी सूरत है तेरी ओह मेरे दिलदारा,

जो तेरे चरना दी सैयां देवे स्वर्ग नजारा,

मेरी रूह रानी ने ले ले नाल एह्दे फेरे,

रूह गद गद हो गई है दातियाँ दर्शन करके तेरे,

मेरे खाव्ब ख्याल च नहीं सी मैनु मिल जो माहि सोहना,

मेरे दिल दी तख्ती ते बैठा बनके आज परोना ,

शहनाइयां भज उठियाँ नि ऑडियो आवन आ जद वेहड़े,

रूह गद गद हो गई है दातियाँ दर्शन करके तेरे,

तनु कमली रमली नु एहने बिन वेखे अपनाया,

एह जग तो सोहना है नि ऑडियो पल्हार मैं पाया,

मेरी बांह न छोड़ी जी दातिया लड़ लग गी मैं तेरे,

रूह गद गद हो गई है दातियाँ दर्शन करके तेरे,

कर मेहर उतार ना तेरे नाम दी एह फुलवाड़ी,

तेरे चरना च बीते लाडी दी जिंदगी हूँ सारी,

तेरी सेवा वस् जावे हूँ ता रोम रोम विच मेरे,

रूह गद गद हो गई है दातियाँ दर्शन करके तेरे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।