लाल तेरे तो मैं लाल मंगदी

पारंपरिक
अन्य भजन बावा लाल दयाल भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हे लाल तेरे तो मैं लाल मंगदी,

दयाल तेरे तो मैं लाल मंगदी,

मेरे सुत्ते भाग जगा दे

खुशियाँ वाली घडी दिखा दे मेरी झोली खैरा पा दे,

लाल तेरे तो मैं लाल मंगदी

दाता दी कोई कमी नही तू सब तो बड़ा दानी,

जग ते मेरे बाद रह जाऊ कोई मेरी निशानी,

तेथो इको दात मैं मंगी कोई चीज ना इस तो चंगी तेरे घर कोई न तंगी,

लाल तेरे तो मैं लाल मंगदी

माँ पे पुत्रा बाद न सजके वीरा भाज न बेहना,

जग दे सब शिंगार ने झूठे एहो सुचा गहना,

देवी पोली मैं भी न्हावा तेथो झोली फल पावा,श्रधा नाल बेठ के खावा,

लाल तेरे तो मैं लाल मंगदी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।