सूरज जब पलके खोले मन नमः शिवाये बोले

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सूरज जब पलके खोले मन नमः शिवाये बोले,

मैं दुनिया से क्यों डरु मेरे रक्षक है भोले,

ॐ नमः शिवाये बोलो ॐ नमः शिवाये,

गंगा धारणवा भव भये बंजन माटी छुये तो हो जाये चन्दन,

बिल भा की पतियों पर वो रिजे पल में दुखी को देख पसीजे,

चत चित वालो को झुलाता आँगन में है ढोले,

सूरज जब पलके खोले मन नमः शिवाये बोले,

मीत उन्ही से हमे भव भेवाव करते असम्ब को वो संभव,

जग में जब कोई हस्ता रोता शिव की ईशा से सब होता,

जिसे देखने हो शिव लीला शिव का दीवाना हो ले,

सूरज जब पलके खोले मन नमः शिवाये बोले,

शम्भू कवज बन जाते जिनका बाल भी बांका होये न उनका,

चाहे कष्टों की चले नित आंधी,

आंच कभी न उन पर आती,

शिव उनकी हर विपदा हरते कभी शिगर कभी होले,

सूरज जब पलके खोले मन नमः शिवाये बोले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।