सावन की रुत है आजा माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सावन की रुत है आजा माँ,हम झूला तुझे झुलाये गे,

फूलो से सजाये गे तुझको मेहँदी हाथो में लगाएंगे,

कोई भेट करे गा चुनरी कोई पहनायेगा चूड़ी,

माथे पे लगाएगा माँ कोई भक्त तिलक सिंदूरी,

कोई लिए खड़ा है पायल लाया है कोई कंगना,

जिन राहो से आएंगे माँ तू भक्तो के अंगना,

हम पलके वहा विशायेगे,

सावन की रुत है आजा माँ,

माँ अम्बा की डाली पे झूला भक्तो ने सजाया,

चन्दन की विशाई चौंकी श्रदा से तुझे भुलाया,

अब छोड़ दे आँख मचोली आजा ओ मैया भोली,

हम तरस रहे है कब से सुन ने को तेरी बोली,

सावन की रुत है आजा माँ,

लाखो हो रूप माँ तेरे चाहे जिस रूप में आजा,

नैनो की प्यास भुजा जा बस इक झलक दिखला जा,

झूले पे तुझे बिठा के तुझे दिल का हाल सुना के,

फिर मेवे और मिश्री का तुझे प्रेम से भोग लगा के,

तेरे भवन पे दौड़ के आएंगे ,

सावन की रुत है आजा माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।