जोगी तेरा दिता खाइये

पारंपरिक
अन्य भजन बाबा बालक नाथ भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जोगी तेरा दिता खाइये तेरे वारे वारे जाइये

स्वासा वाली पूंजी जोगी तेरे नाम कर दिति,

तू ही मेरी जींद जोगी तू ही मेरी जान है,

अन गिन तारे जीवे विच आस्मां दे उस तो भी वध जोगी तेरे एहसान ने,

बाल बाल मेरा करजाई तेरे दर दा,

सारी ही उम्र रहु तेरा पानी भरदा,

तेरे नाम वाली माली हर सास चलदी,

सते ही जन्म जोगी तेतो कुर्बान ने,

अन गिन तारे जीवे विच आस्मां दे उस तो भी वध जोगी तेरे एहसान ने,

ज़िंदगी च रखी जिस चीज दी न आस है,

सुन ले तू ता मेरी हर अरदास है,

मँगने तो पेहला जोगी झोली मेरी भर दिति,

साहा नालो वध जोगी तेरे उते मान है,

अन गिन तारे जीवे विच आस्मां दे उस तो भी वध जोगी तेरे एहसान ने,

ऐसा रंग रंगिया हूँ नहीं बहना है,

मोहनी ने ता होक तेरे दर दा ही रहना है,

बाबू हरबंस जी दे लेख सिद्ध कर दिते ,

तेरा नाम लिया ताहियो बनी पहचान है,

अन गिन तारे जीवे विच आस्मां दे उस तो भी वध जोगी तेरे एहसान ने,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।