है गले में लिपटा नाग बुजंगा काला रे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नंदी दी करके सवारी डमरू वाला रे,

है गले में लिपटा नाग बुजंगा काला रे,

आये है व्याह रचाने गोरा को अपना बनाने,

है भुत प्रेत सब संगी करते है बड़ी हुड दंगी,

क्या अध्भुत रूप बनाया डमरू वाला रे ,

है गले में लिपटा नाग बुजंगा काला रे,

तब देख मैना रानी हुई दिल में बड़ी हैरानी,

बिटिया की भाग फुट गये कैसी किस्मत टकरानी,

ना व्याहु पारवती को डमरू वाला रे,

है गले में लिपटा नाग बुजंगा काला रे,

संग ढाती गिरजा मियां शिव जन्म जन्म के खिवैयाँ,

जब जब जग में मैं आई शिव बने है मेरे सइयां,

माँ जोड़ दो मेरा नाता तू भोला भाला रे,

है गले में लिपटा नाग बुजंगा काला रे,

कहे संजो सुन मंटोला शिव खाये भांग का गोला,

है मस्त मगन अनमोल इनका अड़भंगा चोला,

अपनी रहती मस्ती में जग का आला रे,

है गले में लिपटा नाग बुजंगा काला रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।