डर वा को न बात के ये भक्त है भोले नाथ के

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बोलो कावड़ियाँ बम बम चिलम चला के मारो दम पे दम,

सब मिल गई यारवा साथ के,

डर वा को न बात के ये भक्त है भोले नाथ के

लेले चल भंगियाँ धतूरा हो अरमान रही न अधूरा हो,

किरपा जो होइ भोले नाथ की सपना हो जाए सब पूरा हो,

ये बदले लकीरा हाथ के,

डर वा को न बात के ये भक्त है भोले नाथ के

पाउआ में पड़ जा शाळा हो देख ते ही बाबा का शिवाला हो,

दुख का दर्द सब हर ली है बाड़े भोले नाथ मतवाला हो,

सोनू कुलदीप हाथ रहे माथ पे,

डर वा को न बात के ये भक्त है भोले नाथ के

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।