मेरे भईया रघुवीर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अरे मेरे भईया रघुवीर भात सवेरे लइयो

मेरे माथे का टीका लइयो

टीके पे रतन जड़ियों गले की लइयो जंजीर

भात सवेरे लइयो .........

मेरी कमर की तगड़ी लइयो,

गुठी पे रतन जड़ियों गले की लइयो जंजीर

भात सवेरे लइयो .........

मेरे कानो के कुण्डल लइयो,

झुमकी पे रतन जड़ियों गले की लइयो जंजीर,

भात सवेरे लइयो .........

मेरे हाथो की चुडिया लइयो,

कंगन पे रतन जड़ियों गले की लइयो जंजीर,

भात सवेरे लइयो .........

मेरे पैरो की पायल लइयो,

बिछवे पे रतन जड़ियों गले की लइयो जंजीर,

भात सवेरे लइयो .........

मेरे सब की साड़ी लइयो,

चुनरी पे रतन जड़ियों गले की लइयो जंजीर

भात सवेरे लइयो .........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।