दर्श दिखा दे शेरावालिये भगत ने भूखे तेरे प्यार दे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

लमिया क़तारार विच लग के ऊंची ऊंची आवाज पाए मारदे,

दर्श दिखा दे शेरावालिये भगत ने भूखे तेरे प्यार दे

दुरो दुरो मैया तेरे दर ते श्रदा दी भेटा लेके आये ने,

कर ले काबुल माये भेटा नु श्रद्धा दे फूल माँ चढ़ाये ने,

थक गाइयाँ आखियाँ विचारियाँ वेख ले तू नैन भी पुकार दे,

दर्श दिखा दे शेरावालिये भगत ने भूखे तेरे प्यार दे

कोई भी न थोड़ तेरे दर ते कर दे तू पुरे साढ़े चा माँ,

मंगते माँ वन दर आ गये झोली विच पा दे माँ खैर माँ,

दर तेरा छड़ के माँ जाना नहीं चाहे साहनु कुकर नु मारदे,

दर्श दिखा दे शेरावालिये भगत ने भूखे तेरे प्यार दे

सब दियां भर दे तू झोलियाँ किसे नु भी करि न नराज माँ,

किसे ने भी दरों माँ जाना नि हर कोई रखी बैठा आस माँ,

तुलसी निमाणा दर आ गया बेठ्या माँ सच्ची सरकार दे,

दर्श दिखा दे शेरावालिये भगत ने भूखे तेरे प्यार दे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।