नशा भांग का चढ़ गया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नशा भांग का चढ़ गया गोरा मुझे देखा दिखाई कोई न,

और पीलादे और पीलादे तेरे समाई कोई न,

डगमग डगमग गात यु हाल रे हाथ पकड़ ले मेरा,

तेरा बस की बात नहीं है भोले तू क्यों पागल हो रहा,

जयदा नशा बढ़ गया गोरा मेरा दिल ठिकाई कोई न,

और पीलादे और पीलादे तेरे समाई कोई न,

जन्म जन्म का साथ सलोना मत न अकड़ दिखावे,

इन बाते ने ना छेड़े भोले मेरा लाहु जलावे,

क्यों न दिल ने तू समजावे को मनव का नि कोना,

और पीलादे और पीलादे तेरे समाई कोई न,

दुःख सुख के हम साथी रे दोनों क्यों न फर्ज निभ्या,

तेरी बात न मानी भोले भांग का नशा चढ़ाया,

सोची न माने मेरी काय दया दिखाई को न,

और पीलादे और पीलादे तेरे समाई कोई न,

आज के पाशे न पीयू गोरा ना तने मैं सताउ,

साथ तेरे चलु मैं भोले तेरे लाड लडाऊ,

जो दे कोमल वो मैं खाऊ दास पुराई को न,

और पीलादे और पीलादे तेरे समाई कोई न,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।