राधाजी के पायल के घुंघरू

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधाजी के पायल के घुंघरू नृत्य करते बिखर गये,

श्यामा जी के पायल के घुंघरू नृत्य करते बिखर गये,

नव निधि कुञ्ज में नृत्य करे तो प्रीतम संग राधा प्यारी,

अध्भुत छवि है नित रास की जाये सखी सब बलहारी,

तेरी टूटी पायल बिखरे गुंगरू गुंगरू बिखर के किधर गये,

श्यामा जी के पायल के घुंघरू नृत्य करते बिखर गये,

मन मोहन मन में मेलिंग अति व्याकुलता भारी छाई,

नूपुर चौंक सुने नहीं तो कही पायल भी अति अकुलाई,

खोये किधर अनमोल वो घुंगरू इधर गये के उधर गये,

श्यामा जी के पायल के घुंघरू नृत्य करते बिखर गये,

श्री ललिता सखी सहजारी ढूंढ रही मिल कर घुंगरू,

सुनी पायल बिन घुंगरू के बंधे नहीं पग पे घुंगरू,

ना जाने ये कैसे बंधे पायल से कैसे उत्तर गये,

श्यामा जी के पायल के घुंघरू नृत्य करते बिखर गये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।