भोले तेरी ही मूरत का दीदार चाहिए

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आया सावन झूम के मियां नाचे नो नो तार,

तेरे दर पे जो भी आवे हॉवे मालामाल,

मुझको भी इक वर तेरा प्यार चाहिए,

भोले तेरी ही मूरत का दीदार चाहिए,

तुम्हे कब से पुकारे अब आओ डमरू वाले,

जल्दी से आके मेरी बिगड़ी जल्दी बना दे बना दे,

मुझको भी इक बार तेरी किरपा चाहिए,

भोले तेरी ही मूरत का दीदार चाहिए,

तेरे तन पे भभूति माथे पर देखो चंदा चंदा,

भोले की जटा से बहती है देखो गंगा,

मुझको भी इक वार तेरा दर्शन चाहिए,

भोले तेरी ही मूरत का दीदार चाहिए,

भागमवार धारी कारे नंदी की सवारी,

भोले त्रिपुरारी है महिमा इनकी न्यारी,

शर्मा को इक वर तेरा साथ चाहिए,

भोले तेरी ही मूरत का दीदार चाहिए,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।