भोले की दीवानी नाच रही

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

चाली जब भोले की कावड़ ढोल नगाड़े भाज रहे,

भोले की दीवानी नाच रही मस्ती में दीवाने नाच रहे

दी जे का फुल बेस बड़ा के कावड़िये जब नाचे,

चढ़ गई शिव के नाम की मस्ती बम बम करते बाजे,

कही पे डमरू की डम डम कही पे घुंगरू भाज रहे,

भोले की दीवानी नाच रही मस्ती में दीवाने नाच रहे

पी के टली झूम रे कोई बिन पिए ढोंग रचावे,

हरी हरी घोट के पीवे कोई भर के चिलम उड़ावे,

कही पे शिव गोरा झांकी जाम कही पे लाग रहे,

भोले की दीवानी नाच रही मस्ती में दीवाने नाच रहे

सारी दुनिया में भाजे से शिव के नाम का डंका,

सभी की झोली भर देते ना इनमे कोई शंका,

शीतल भी धोकर में पड़ी मेरे सिर पर तेरा हाथ रहे,

भोले की दीवानी नाच रही मस्ती में दीवाने नाच रहे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।