शिव भोले की किरपा से दुनिया ये चल रही है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव भोले की किरपा से दुनिया ये चल रही है,

भगतो की सोइ किस्मत पल में बदल रही है,

शिव भोले की किरपा से दुनिया ये चल रही है,

हुआ जब समुन्दर मंथन निकला था विष हला हल,

पे गये थे विष को सारे तुम नील कंठ बन कर,

भोले की देख लीला हैरानी हो रही है,

शिव भोले की किरपा से दुनिया ये चल रही है,

आकश से जो निकली गंगा की तेज धारा,

किया था जटा में धारण पृथ्वी को था उभारा,

पीछे तो भागी रथ के माँ गंगा चल रही है,

शिव भोले की किरपा से दुनिया ये चल रही है,

असुरो को वर है देते कहलाते हो भंडारी,

बस्मा सुर जल्नधर वरदान पाए भंडारी,

रावण ने पाई लंका किस्मत बदल रही है,

शिव भोले की किरपा से दुनिया ये चल रही है,

धन धान सब को बांटे खुद हाल है फकीरी,

दिया सोना चांदी सब को मृग शाल खुद लपेटी,

तेरी दया से दुनिया भण्डार भर रही है,

शिव भोले की किरपा से दुनिया ये चल रही है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।