आई बागों में बहार झूला झूले राधा प्यारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आई बागों में बहार, झूला झूले राधा प्यारी

झूले राधा प्यारी, हाँ झूले राधा प्यारी

सावन की ऋतु है आई, घनघोर घटा नभ छाई

ठंडी-ठंडी पड़े फुहार, झूला झूले राधा प्यारी

आई बागों में ..............

हो मस्त मोर यूँ नाचे, मोहन की मुरलिया बाजे

कू-कू कोयल करे पुकार, झूला झूले राधा प्यारी

आई बागों में ..........

सब सज रहीं नार नबेली, नटखट करते अठखेली

कर के सोलह सिंगार, झूला झूले राधा प्यारी

आई बागों में ..............

राधा संग में बनवारी, झूलें हैं सखियाँ सारी

गावेँ गीत मल्हार, झूला झूले राधा प्यारी

आई बागों में ..............

भए ऐसे मगन कन्हाई, चलती ठंडी पुरवाई

छम-छम बरसे मूसलधार, झूला झूले राधा प्यारी

आई बागों में ...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।