मैं रोनी आ तेरे करके

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॥ पावन पाठ ॥

मैं रोनी आ तेरे करके

तू आया बाद मुद्ता दे,

आ बैठ सामने जग तू,

ख़ुशी विच ढुल पये अपने,

नहीं कोई जोर जजबेया ते,

तू आया बाद मुद्ता दे,

मैं रोनी आ तेरे करके

उडीका विच गुजर दियां सी,

गरीबा ताने कस दियां सी,

आसा किते नहीं शिकवे,

तू आया बाद मुद्ता दे,

मैं रोनी आ तेरे करके

नजर वारा जिगर वारा मैं नजर वारा उम्र वारा,

मैं सब कुछ कर दिया सदके तू आया बाद मुद्ता दे,

मैं रोनी आ तेरे करके

एहो दिन रेन मंगिया एह तेरे ले चैन मनग्य है,

ना सी कुझ होर वस मेरे तू आया बाद मुद्ता दे,

मैं रोनी आ तेरे करके

अगर एह पल नहीं आउंदे आसा साहिल ते डूभ जांदे,

ते फिर लभ्य नहीं लभदे तू आया बाद मुद्ता ते,

मैं रोनी आ तेरे करके

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।