ये गंगा जल लेकर भोले तुम्हे चढ़ाने आये है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बड़ी दूर से ये कावड़ियाँ द्वार तुम्हारे आये है,

ये गंगा जल लेकर भोले तुम्हे चढ़ाने आये है,

कोई काशी कोई हरिद्वार से भर कावड़ियाँ लाया,

आशुतोष बगम्बर धारी भोले नाथ तुम्हे चढ़ाया,

भगवा धारी कही रुका न बस तेरी लगन लगाए है,

ये गंगा जल लेकर भोले तुम्हे चढ़ाने आये है,

देवघर वाले भोले बाबा की जग में शान निराली,

ओहघर दानी दान दे वहियाँ भरते झोली खाली,

तेरे द्वार से खाली गया ना जो माँगा सो पाए है,

ये गंगा जल लेकर भोले तुम्हे चढ़ाने आये है,

सुबहो शाम वे नाम ये बोले भोले हर हर दम दम,

तेरे सुमिरन कर के बाबा मिट जाता हर इक दम,

सच्चे मन को तुम को ध्यावे तेरे दर्शन पायेहै,

ये गंगा जल लेकर भोले तुम्हे चढ़ाने आये है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।