जोगन जोगन हां जोगन जोगन

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जोगन जोगन हां जोगन जोगन हां जोगन जोगन ,

लगा के बसम चंदन कपड़ा गिर्वा दारान,

करके बन गई मैं शिव की जोगन,

भक्ति में ये तन मन कर दियां शिव को अर्पण,

मैं तो बन गई शिव जी की जोगन,

जोगन जोगन हां जोगन जोगन हां जोगन जोगन ,

भांग पी लेती हु मार चिलम की धम,

जब से जोग लग गया भूल गया हु मैं सारा ये गम,

शिव से मैं शिव से तू शिव से है सारा जहां,

रिमझिम बरसी सावन भक्ति में झूमे मन मैं तो बन गई शिव की जोगन,

जोगन जोगन हां जोगन जोगन हां जोगन जोगन ,

अपनों से गम मिला शिव की भक्ति में खुशियां मिली,

दुनिया से गम मिला शिव की भक्ति में खुशियां मिली,

प्रीत शिव से लगा मन की भक्ति में कलियाँ खिली,

शिव ने जीवन दियां उनका अवतार है,

शिव की करू मैं पूजन ऐसी लगी है लगन,

मैं तो बन गई शिव जी की जोगन,

जोगन जोगन हां जोगन जोगन हां जोगन जोगन ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।