चुनड़ी बनाई मईया पाई पाई जोड़ के

सौरभ मधुकर
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॥ पावन पाठ ॥

चुनड़ी बनाई मईया पाई पाई जोड़ के,

राख लीजै मान म्हारी चुनड़ी नै ओढ़ के,

चुनड़ी बनाई मईया पाई पाई जोड़ के |

धन धन भाग थाने चुनड़ी उढ़ावा माँ,

सोणी-सोणी चुनड़ी नै हाथां से सजावा माँ,

जचे ना सिंगार थारो चुनड़ी नै छोड़ के,

चुनड़ी बनाई मईया पाई पाई जोड़ के |

चुनड़ी बनाई म्हारी जितनी समाई माँ,

ओढ़े तो म्हे जान जास्याँ,दाय थाने आई माँ,

काई तो मिलैगो मईया दिल म्हारो तोड़ के,

चुनड़ी बनाई मईया पाई पाई जोड़ के |

ओढ़ के राखिजै मईया यो ही म्हारो भाव है,

चुनड़ी उढ़ाता रवां,दिल में यो चाव है,

राख मना दीजै म्हारी चुनड़ी नै मोड़ के,

चुनड़ी बनाई मईया पाई पाई जोड़ के |

बनवारी चुनड़ी में नाही गोटा-तारा है,

बड़ी अनमोल,फीका चाँद सितारा है,

निकलेगा प्यार मईया,देखले निचोड़ के,

चुनड़ी बनाई मईया पाई पाई जोड़ के |

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।