बम भोले शिव भोले को जो रिझाना हो

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बम भोले शिव भोले को जो रिझाना हो,

पुराण सा काज करना हो गंगा जल शिव पे चढ़ा देना,

कावड़िया बिगड़ी बने गी तेरी जैकारा बम बम लगा देना,

शिव भोले को जो रिझाना हो गंगा जल शिव पे चढ़ा देना

पग छाले पड़े तो मत गबरा तू हार न हिमत कावड़ियाँ,

शिव शमभू सुने गे तेरी सदा ना हो खंडित तेरी साधना,

सारी पीड़ा मन में छुपा लेना,

शिव भोले को जो रिझाना हो गंगा जल शिव पे चढ़ा देना

इस में शिव को जिस ने धाया,

किया पाप मुकत शिव ने उसको जो इनकी शरण में है आया,

बाबा के धाम कावड़ियाँ और दुःख अपने तू बता देना,

शिव भोले को जो रिझाना हो गंगा जल शिव पे चढ़ा देना

तुझमे शम्भू की विशेष किरपा तेरा रूप कावड़ियाँ भोले का,

तेरा आहिद काल न कर पायेगा तेरा रक्षक है खुद भोला,

शिव शार्दुल सूर्य संग तेरे मन से भये अपने हटा देना

शिव भोले को जो रिझाना हो गंगा जल शिव पे चढ़ा देना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।